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वराह पुराण: विष्णु के वराह अवतार की अद्भुत कथा
‘वराह पुराण’ वैष्णव पुराणों में से एक प्रमुख पुराण है। इसमें भगवान विष्णु के दशावतारों में से एक महत्वपूर्ण अवतार ‘वराह’ का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह पुराण 270 अध्यायों और लगभग 10,000 श्लोकों में विभाजित है, जिसमें भगवान वराह के धर्मोपदेश और उनकी महान कथाएँ समाहित हैं।
वराह अवतार की महिमा
भगवान विष्णु ने पृथ्वी का उद्धार करने के लिए वराह का अवतार लिया था। इस पुराण में वराह अवतार की गाथा अत्यंत विशद रूप में प्रस्तुत की गई है। इसके श्लोकों में भगवान वराह के उपदेश कथाओं के रूप में दिए गए हैं, जो धर्म, नीति, और सदाचार पर आधारित हैं। ‘वराह पुराण’ में तीर्थों के महत्व, दान-दक्षिणा की महिमा, और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का विस्तृत विवरण है।
विष्णु पूजा और धार्मिक अनुष्ठान
‘वराह पुराण’ में विष्णु पूजा का अनुष्ठान विधिपूर्वक करने की शिक्षा दी गई है। इसमें त्रिशक्ति माहात्म्य, शक्ति महिमा, गणपति चरित्र, कार्तिकेय चरित्र, और रुद्र क्षेत्रों का वर्णन भी है। इसके अलावा, अग्निदेव, अश्विनीकुमार, गौरी, नाग, दुर्गा, कुबेर, धर्म, रुद्र, पितृगण, चन्द्र की उत्पत्ति, मत्स्य और कूर्मावतारों की कथा, व्रतों का महत्व, गोदान, श्राद्ध, और अन्य संस्कारों को विधिपूर्वक सम्पन्न करने का विवरण मिलता है।
दशावतार की कथा
इस पुराण में ‘दशावतार’ की कथा को पारम्परिक रूप में न देकर मासों की द्वादशी व्रत के माहात्म्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक मास की द्वादशी पर एक अवतार का स्मरण किया जाता है, जैसे मार्गशीर्ष मास में ‘मत्स्य अवतार’, पौष मास में ‘कूर्म अवतार’, माघ मास में ‘वराह अवतार’, और इसी प्रकार अन्य मासों में अन्य अवतारों का।
सृष्टि की रचना और धर्म का प्रचार
‘वराह पुराण’ में सृष्टि की रचना, युग माहात्म्य, पशुपालन, सप्त द्वीपों का वर्णन, नदियों और पर्वतों का वर्णन, सोम की उत्पत्ति, और विभिन्न प्रकार के दान-पुण्य की महिमा का वर्णन किया गया है। इसमें महिषासुर वध की कथा भी है और श्राद्ध एवं पिण्ड दान की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है। इस पुराण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें वास्तविक धर्म का निरूपण बड़े अच्छे ढंग से किया गया है।
धर्म और जीवन जीने की शिक्षा
‘वराह पुराण’ में चारों वर्णों के लिए सत्य धर्म का पालन और शुद्ध आचरण करने पर बल दिया गया है। ब्राह्मण को अहंकार रहित, स्वार्थ रहित, जितेन्द्रिय और अनासक्त योगी की भांति होना चाहिए। क्षत्रिय को अहंकार रहित, आदरणीय, और छल-कपट से दूर रहना चाहिए। वैश्य को धर्मपरायण, दानी, और कर्त्तव्य परायण होना चाहिए। शूद्र को निष्काम भाव और सेवा भाव से कार्य करने वाला, शुद्धात्मा, विनयशील, और श्रद्धावान होना चाहिए। ऐसा शूद्र हज़ारों ऋषियों से बढ़कर होता है।
पाप और प्रायश्चित्त
इस पुराण में पाप और प्रायश्चित्त की महिमा भी बताई गई है। नचिकेता उपाख्यान में पाप-नाश के उपायों का सुंदर वर्णन किया गया है। इसमें बताया गया है कि हिंसा, चुगली, चोरी, आग लगाना, जीव हत्या, असत्य कथन, अपशब्द बोलना, और अन्य पाप कर्मों से बचने के लिए क्या करना चाहिए।
भौगोलिक वर्णन
‘वराह पुराण’ का भौगोलिक वर्णन अन्य पुराणों की तुलना में अधिक प्रामाणिक और स्पष्ट है। मथुरा के तीर्थों का वर्णन अत्यन्त विस्तृत रूप से किया गया है। इसमें भगवान श्रीहरि के वराह अवतार की कथा के साथ ही अनेक तीर्थ, व्रत, यज्ञ-यजन, श्राद्ध, तर्पण, दान और अनुष्ठानों का भी शिक्षाप्रद और आत्मकल्याणकारी वर्णन है।
निष्कर्ष
‘वराह पुराण’ भारतीय पुराण साहित्य का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसमें भगवान विष्णु के वराह अवतार की अद्भुत गाथा और धर्म, नीति, और सदाचार पर आधारित उपदेश समाहित हैं। यह पुराण न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का मार्गदर्शन करता है, बल्कि जीवन जीने की उच्चतम शिक्षा भी प्रदान करता है। ‘वराह पुराण’ का अध्ययन और अनुशीलन प्रत्येक व्यक्ति के लिए अत्यंत लाभकारी और प्रेरणादायक है।
वराह पुराण हिंदी पीडीऍफ़ ( Varaha Puran PDF Hindi Book) के बारे में अधिक जानकारी:-
Name of Book | वराह पुराण | Varaha Puran PDF |
Name of Author | Geeta Press |
Language of Book | Hindi |
Total pages in Ebook) | 414 |
Size of Book) | 65 MB |
Category | Religious |
Source/Credits | archive.org |
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