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श्रीनरसिंह पुराण का संक्षिप्त परिचय
श्रीनरसिंह पुराण का हिन्दी अनुवाद अब सभी भगवत्प्रेमी महानुभावों की सेवा में प्रस्तुत है। यह पुराण पहले ‘कल्याण’ के विशेषांक (वर्ष ४५, १९७१) के रूप में प्रकाशित हुआ था, जिसमें ‘अग्निपुराण’ और ‘गर्गसंहिता’ के उत्तरार्ध का समावेश था। इसके महत्त्व, उपयोगिता और अत्यधिक मांग को देखते हुए अब इसे ग्रन्थाकार में पुनः प्रकाशित किया गया है।
महत्वपूर्ण जानकारी:
- लेखक: यह महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित एक उपपुराण है।
- रचना काल: शोधकर्ता आर. सी. हाज़रा के अनुसार, यह 5वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लिखा गया था। इसका तेलुगु संस्करण 1300 ई. के बाद का है।
- संरचना: इसमें 68 अध्याय और 3,464 श्लोक हैं।
- विशेष अध्याय: 8वां अध्याय ‘यम गीता’ के तीन संस्करणों में से एक है। अध्याय 36 से 54 तक भगवान विष्णु के दस अवतारों का विस्तार से वर्णन है। अध्याय 21 और 22 में सूर्यवंश और सोमवंश का वर्णन है, जिसमें अंत में भगवान गौतम बुद्ध और क्षेमक का वर्णन है। 41 से 44 अध्याय तक नरसिंह अवतार की कथा, 47 से 52 अध्याय तक राम कथा और 53वें अध्याय में भगवान कृष्ण की कथा सारगर्भित रूप में दी गई है। अध्याय 57 से 61 तक स्वतंत्र लेख हैं, जिन्हें ‘हारीत संहिता’ या ‘लघु हारीत स्मृति’ कहते हैं।
मुख्य विषय:
अन्य पुराणों की तरह, श्रीनरसिंह पुराण भी भगवान श्रीवेदव्यास रचित माना जाता है। इसमें सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वन्तर और वंशानुचरित का सुंदर वर्णन किया गया है। भगवान के अवतारों की लीला कथा, जिसमें श्रीराम का लीलाचरित प्रधान रूप से वर्णित है।
विशेष कथाएँ:
- मार्कण्डेय मुनि की कथा: इसमें श्रीमार्कण्डेय मुनि की मृत्युपर विजय प्राप्त करने की सुंदर कथा है, जिसमें ‘यम गीता’ का वर्णन है।
- भक्तिके स्वरूप और भक्तों के लक्षण: इसमें भक्तिके स्वरूप, भक्तों के लक्षण तथा ध्रुव आदि भक्तों के सुंदर चरित्रों का वर्णन है।
- स्तोत्र-मन्त्रों का विधान: इसमें कई ऐसे स्तोत्र-मन्त्रों का विधान बताया गया है, जिनके अनुष्ठान से भोग-मोक्ष की सिद्धि प्राप्त हो सकती है। कलियुग के मनुष्यों के लिए इसमें बड़ी ही आशाप्रद बातें हैं।
निवेदन:
इस छोटे से पुराण में बहुत ही उपयोगी और जानने योग्य सामग्री है। आशा है कि पाठक इसका पठन-मनन करेंगे तथा इसमें उल्लिखित कल्याणकारी विषयों को अपने जीवन में उतारकर लाभ उठाएंगे।
निष्कर्ष:
भगवान श्रीनरसिंह की महिमा और उनकी लीला कथाओं का यह पुराण हमारे जीवन में धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे पढ़ने और समझने से हमें भगवान की भक्ति और ज्ञान का प्रसार मिलेगा, जिससे हम अपने जीवन को सुखमय और सफल बना सकें।
इस प्रकार, यह श्रीनरसिंह पुराण हिन्दी अनुवाद के साथ, सभी भक्तों के लिए एक अनुपम भेंट है, जो उन्हें भगवान की लीलाओं और उनके द्वारा दिए गए उपदेशों का लाभ प्राप्त करने में सहायता करेगा। किया गया है, साथ ही पंडित पंचाननजी तर्करत्न द्वारा सम्पादित बंगला अनुवाद से भी सहायता ली गई है।
नरसिंह पुराण हिंदी पीडीऍफ़ ( Narsimha Puran PDF Hindi Book) के बारे में अधिक जानकारी:-
Name of Book | नरसिंह पुराण | Narsimha Puran PDF |
Name of Author | Geeta Press |
Language of Book | Hindi |
Total pages in Ebook) | 318 |
Size of Book) | 650 MB |
Category | Religious |
Source/Credits | archive.org |
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