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कल्कि पुराण पीडीएफ: पुस्तक का सारांश
“कल्कि अवतार अभी क्यों?”
प्रस्तावना:
शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, हम वर्तमान में कलियुग के पहले चरण में जी रहे हैं। कलियुग की कुल अवधि 4,32,000 वर्ष है, जिसमें से 5,090 वर्ष बीत चुके हैं। पुराणों में बताया गया है कि कलियुग के चौथे चरण में भगवान विष्णु का कल्कि अवतार होगा, जो इस युग का अंत कर सत्ययुग की स्थापना करेगा। लेकिन यहाँ एक सवाल उठता है: जिस अवतार के प्रकट होने में लाखों वर्ष शेष हैं, उसकी पूजा-अर्चना अभी क्यों की जाए? और उससे क्या लाभ होगा?
नारायण का लीला संसार:
यह संसार नारायण और दैवी शक्तियों का लीला स्थल है। नारायण का मुख्य दायित्व पृथ्वी पर धर्म की स्थापना और भक्तों की रक्षा करना है, और इसी उद्देश्य से वे समय-समय पर अवतार धारण करते हैं। गीता में भगवान श्रीकृष्ण का उद्धरण है:
“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारतः, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।”
भगवान का अवतार किसी समय सीमा में बंधा नहीं होता। जब भी अधर्म का प्रकोप बढ़ता है और धर्म की स्थापना की आवश्यकता होती है, तब वे अवतार धारण करते हैं।
वर्तमान परिस्थितियाँ और कल्कि अवतार:
आज हम चारों ओर नजर डालें तो कलियुग के चौथे चरण के लक्षण इस पहले चरण में ही दिखाई देने लगे हैं। धर्म, सत्य, दया, क्षमा और पवित्रता का लोप हो गया है। समाज में धन और पाखंड का बोलबाला है, और प्रकृति असंतुलित हो गई है। इन सभी परिस्थितियों से ऐसा प्रतीत होता है कि कल्कि अवतार का समय निकट है।
कल्कि अवतार की अद्वितीय लीला:
रामावतार और कृष्णावतार के समय में भी समाज ने उन्हें भगवान के रूप में नहीं पहचाना था। लेकिन कल्कि अवतार की लीला निराली है। अभी वे प्रकट नहीं हुए हैं, फिर भी उनके मंदिरों का निर्माण हो रहा है, मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है, और भक्तों को उनके नाम से असंख्य लाभ प्राप्त हो रहे हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि दैवी जगत में कल्कि अवतार हो चुका है। अब केवल उनका प्रत्यक्ष प्राकट्य शेष है।
महामंत्र और अनुभव:
यदि आप श्री कल्कि जी की लीला का अनुभव करना चाहते हैं, तो उनके महामंत्र:
“जय कल्कि जय जगत्पते पद्मापति जय रमा पते”
और बीज मंत्र:
“जय श्री कल्कि जय माता दी”
का जाप करें। प्रार्थना के साथ फल समर्पण करें और देखें कि कैसे वे आपको समस्याओं से बाहर निकलने का मार्ग दिखाते हैं और आपके परिवार की रक्षा करते हैं।
निष्कर्ष:
श्री कल्कि अवतार हो चुका है, केवल उनका प्रत्यक्ष प्राकट्य शेष है।
“कल्कि पुराण पीडीएफ” का सार यही है कि भगवान श्री कल्कि का अवतार दैवीय जगत में हो चुका है और अब उनकी लीला का प्रत्यक्ष अनुभव करने के लिए हमें उनके महामंत्र और बीज मंत्र का जाप करना चाहिए।
कल्कि पुराण हिंदी गीता प्रेस पीडीऍफ़ ( Kalki Puran PDF Hindi Book) के बारे में अधिक जानकारी:-
Name of Book | कल्कि पुराण | Kalki Puran PDF |
Name of Author | Geeta Press |
Language of Book | Hindi |
Total pages in Ebook) | 260 |
Size of Book) | 1 MB |
Category | Religious |
Source/Credits | archive.org |
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